सोच कि शक्ति समझ तू मूरख
सोच कि शक्ति समझ तू मूरख
मिटटी से हीरा तभी तोह बनेगा
हीरे कि चमक बी मिटटी थी कभी
तपी सूरज में , दबी वो धरा में
लड़ी वक़्त से , उडी हवा में
तब जाके फिर बनी हीरे सी
खुद को मिटटी समज जो गया तू
कैसे चमकेगा हीरे सा दुनिया में .
मेहनत जो कर गया तू बन्दे .
तपिश जो सह गया तू बन्दे
मिटटी से हीरा तू ही बनेगा
सोच कि शक्ति समझ तू मूरख
सोच कि शक्ति समझ तू मूरख
मिटटी जो सोचे गन्दगी भी बनजाये
मिटटी जो सोचे जिंदगी भी दिखलाये
मिटटी जो सोचे ईश्वर भी दर्शाए
सोच कि शक्ति समझ तू मूरख
सोच कि शक्ति समझ तू मूरख
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