अकेला ही आया अकेला जाऊंगा ,क्षणभंगुर जीवन को मतलब दे जाऊंगा .
सोच हर वक़्त बस यह रह जाती है , खून से जादा गर्मी तो यह दर्द ले आती है ||
दुःख है अपना सुख है पराया , दुःख को अपनाया तो सम् बन पाया .
दुःख को ही शिक्षक मैंने अपनाया , सिखा गया मुझको यह जीवन की माया ||
आज जो क्षण ह कल नहीं रहेगा , किस बात का गुरूर है , किस ताकत का नशा है
धरा से निकला इसमें ही रमेगा , जब समजा इस सच को तब ईस्वर तेरे करीब मई आया ||
मौत से बड़ा सच क्या कभी है पाया , जो समजा ये गहराई , दुनिया लगती ह माया ,
कर्मभूमि है रंगमंच , सब कलाकार ह इसमें , कला को जी लु , यह तभी समझ पाया ||
लोग आएंगे लोग जाएंगे , रह जायेगा तो सिर्फ बस मेरी द्रढ़ इक साया
सम्-भाव अपनाया तब ऊपर बढ़ा हु , न सुख-दुःख का दर ह , सब उसको ही चढ़ाया ||
ईस्वर दे शक्ति रंगमंच को निभा लु , तेरी नज़र में एक कोन मई बी अपना लु
इस संसार में रह जाऊ बन के एक माया ||
नाम मेरा भी हो जाये , कण सा तुजमे रह जाऊ ,ईस्वर दे शक्ति , खुद में बस समां ले
संसार तो क्षणिक है , तू ब्रह्मन है ईस्वर , और तू ही है माया||
-aBy